बुधवार, 31 मार्च 2010

अजन्मी वह

शायद दोष
अक्षरों का है
जो खुद को
संजो नहीं पाए
कोरे कागजों पर।
या फिर
कागजों ने ही
की है खता
कि खुद में समेट नहीं पाए
अक्षरों को।
पर सच है कि
खड़े हैं दोनों
समय के कटघरे में
कि एक सुन्दर कृति
रह गई अजन्मी।

14 टिप्‍पणियां:

  1. पर सच है कि
    खड़े हैं दोनों
    समय के कटघरे में
    कि एक सुन्दर कृति
    रह गई अजन्मी।
    दोनो स्थितियों में यह एक रचना की भ्रूण हत्या है
    कटघरा लाजिमी है
    सुन्दर रचना

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  2. akshar ho yaa kagaz dono kaa istmaal dimaagee haalat par nirbhar hotaa he.../
    soch he, achhi rachna he../ saadhuvaad.

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  3. खड़े हैं दोनों
    समय के कटघरे में
    कि एक सुन्दर कृति
    रह गई अजन्मी।
    अति संवेदनशील रचना , सुन्दर अभिव्यक्ति और मन मस्तिष्क को झकझोरता प्रभाव ! बहुत खूब !

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  4. सुन्दर भाव,सुन्दर रचना!

    कुंवर जी,

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  5. वाकई सुंदर कृति, लेकिन अजन्मी नहीं जन्मी। कागज पर आकार लेकर पाठकों के समक्ष अभिव्यक्त हो रही है। कमाल की रचना। बधाई।

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  6. समय के कटघरे में
    कि एक सुन्दर कृति
    रह गई अजन्मी।
    अति संवेदनशील रचना , सुन्दर अभिव्यक्ति और मन मस्तिष्क को झकझोरता प्रभाव ! बहुत खूब !

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  7. THANKS CHETNA JI
    MERA HOSLA BADANE KE LIYE
    UMEEND HAI AAGE BHI HUMARA HOSLA BADHAEGI..

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  8. bahut acha

    http://kavyawani.blogspot.com/

    http://kavyawani.blogspot.com/


    shekhar kumawat

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  9. मर जाती हैं/बहुत सी कविताएं/कविता बनने से पहले।
    इन अनकथ शब्द शहीदों पर आपने कविता लिखी-साधुवाद!
    -suresh baranwal/subani25@gmail.com

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