prateeksha लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
prateeksha लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 27 दिसंबर 2009

सो गयी प्रतीक्षा थक कर तब गुनगुनाते तुम आये
झुलस बिखर गए आस सुमन तब बदरी बन तुम छाये
यह महज संयोग नहीं प्रिय, हूँ सदियों से शापित मैं
चाह जिस यज्ञ से कुछ पाना बन शर्मिष्ठा हुई अर्पित मैं