मंगलवार, 4 मई 2010

सांसों में बसी दुआएं

छीन कर

मेरे हिस्से की

मुट्ठी भर खुशी,

खो दिया है

तुमने शायद,

सकून आसमां भर।

मेरी सांसों में अब

बस गई हैं दुआएं

कि तेरी आहों का

तुझ पर न

पड़ जाए असर।

10 टिप्‍पणियां:

  1. मेरी सांसों में अब
    बस गई हैं दुआएं
    कि तेरी आहों का
    तुझ पर न
    पड़ जाए असर।
    बहुत खूब ---- सुन्दर

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  2. नाम चेतना संग में सृजन का चलता काम।
    रचना में जो भाव हैं हुआ है सार्थक नाम।।


    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com

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  3. बेहद भावपूर्ण रचना ..जब कुछ लम्हे दिल छू जाते है तब ही ऐसे अलफ़ाज़ निकलते है

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  4. waah bahut khoobsoorti se sanjoya bhavon ko wo bhi bahut kam shabdon me......

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  5. Rachna kahin chhu si gayi....aapse ek guzarish hai ...zara bade font size men likhen,toh aapka blog padhne men aasani hogi...punasch rachna ke liye "wah"

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  6. अब तो यही दुआ है कि मेरी आहों का साया तुझ पर न पड़े ..मगर ये कैसे हो सकता है....दर्द दिया है जिसने उसे अहसास भी तो हो....

    चंद पंक्तियां पर जोरदार बात कही गई है..मुबारक हो..जल्दी जल्दी लिखा करें...

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  7. khoobsoorat ladi. bhavnaon ke dhage main shabdon ke ke moti kya khoob piroye hain. padane wala barbas hi mahsoos karane lag jata hai us dard ko.

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