आज अरसे बाद फिर
पिघला कुछ मन में
लाओ, कलम दो
कविता उमड़ती है।
भावों के बादलों से
आकुल-व्याकुल मन है
कोई स्नेहिल आंचल दो
आंखें बरसती हैं।
मन ही नहीं चाहता पढऩा
मन की मौन भाषा
कौन सुनेगा इसकी
आंखें कुछ कहती हैं।
छैला संदु पर बनी फिल्म को लेकर लेखक-फिल्मकार में तकरार
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मंगल सिंह मुंडा बोले, बिना उनसे पूछे उनके उपन्यास पर बना दी
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लिखित अनुम...
8 वर्ष पहले
मन की मौन भाषा
जवाब देंहटाएंकौन सुनेगा इसकी
आंखें कुछ कहती हैं ।
सुन्दर अभिव्यक्ति !