भगाने को
मन का अंधकार,
काफी है एक
टिमटिमाता दीया!
पलटकर एक नजर
देखना उनका
जोड़ जाता है जिया!
मु_ी भर सकून,
नजरो भर आकाश,
आंचल में लंू समेट
बस इतना दो प्यार!
टूटे नहीं लय-छंद,
दास्तां नहीं यह
हार-जीत की,
चाहत बस इतनी सी
जीवन में
कविता रहे बरकरार!
छैला संदु पर बनी फिल्म को लेकर लेखक-फिल्मकार में तकरार
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मंगल सिंह मुंडा बोले, बिना उनसे पूछे उनके उपन्यास पर बना दी
गई फिल्म, भेजेंगे लिगल नोटिस जबकि निर्माता और निर्देशक का
लिखित अनुम...
8 वर्ष पहले
बहुत अच्छा लिखा।
जवाब देंहटाएंसुनील पाण्डेय
इलाहाबाद।
09953090154